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उज्जैन में 400 मतदान केंद्रों पर केवल महिलाएं कराएंगी चुनावी
उज्जैन के 400 मतदान केंद्रों पर चुनाव कराने केवल महिला कर्मचारी ही जाएंगी। वे ही पीठासीन अधिकारी और मतदान अधिकारियों की भूमिका निभाएंगी। महिला मतदान प्रतिशत बढ़ाने को भी लाख जतन हो रहे हैं।
महिलाओं को ही केंद्र में रखकर मतदाता जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। अब तक बूथ स्तर पर महिलाओं की कलश यात्रा निकाली जा चुकी है। सास-बहू सम्मेलन, दीपोत्सव सहित गीत-गायन, मेहंदी आदि प्रतियोगिताएं कराई जा चुकी हैं। आगामी दिनों में महिला सम्मेलन सहित कई ओर भी कार्यक्रम तय कर रखे हैं।
निर्वाचन आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार 2018 के चुनाव में महिलाओं की मतदान में भागीदारी 74.34 प्रतिशत और पुरुषों की 78.81 प्रतिशत थी। इसके पहले 2013 के चुनाव में महिलाओं की मतदान में भागीदारी 70.49 प्रतिशत और पुरुषों की 76.93 प्रतिशत थी।
यानी पांच वर्षों में मतदान में महिलाओं की मतदान में भागीदारी 3.86 प्रतिशत और पुरुषों की भागीदारी 1.88 प्रतिशत बढ़ी। महिलाओं की ये बढ़त पुरुषों के मुकाबले दोगुना थी। वह भी तब, जब प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस ने महिलाओं की उपेक्षा कर उज्जैन जिले के सातों विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रत्याशी पुरुषों को बनाया था।
अब पांच वर्षों में काफी कुछ बदला है। शिक्षा के ग्राफ के साथ राजनीतिक जागरूकता भी बढ़ी है। इस बार जिले से एक महिला उम्मीदवार (उज्जैन उत्तर सीट से माया त्रिवेदी) भी चुनाव मैदान में है। इसी वर्ष नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी पारित हुआ है, जिसके कारण आगामी विधानसभाओं और लोकसभाओं में महिलाओं की भागीदारी कम से कम 33 प्रतिशत होना निश्चित रूप से दिखाई देना निश्चित है।